हनुमान चालीसा की रचना की कहानी | गणपति बाप्पा मोरया | जय श्री गणेश

हनुमान चालीसा की रचना की कहानी | 

गणपति बाप्पा मोरया | जय श्री गणेश 


हनुमान चालीसा की रचना की कहानी

 जय श्री हनुमान…. पवन पुत्र हनुमान… केसरी नंदन….. जय बजरंबली


ऐसी मान्यता है की... कलयुग में श्री हनुमान जी सबसे जल्दी प्रसन्न हो जाने वाले 
भगवान हैं. 

बाबा तुलसीदास ने हनुमान जी की स्तुति में कई रचनाएँ रची है. जिनमें हनुमान बाहुक, हनुमानाष्टक और हनुमान चालीसा प्रमुख हैं. हनुमान चालीसा की रचना के पीछे 
एक बहुत जी रोचक कथा है.


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हनुमान चालीसा की रचना की कहानी 


आइये जानते हैं.... 

हनुमान चालीसा की रचना की कहानी

हनुमान चालीसा की रचना....  यदि किसी युग में भगवान को आसानी से
प्राप्त किया जा सकता है तो वह युग है.... कलियुग.
 इस कथन को सत्य करता एक दोहा रामचरितमानस में तुलसीदास जी ने लिखा है....
 
कलिजुग जोग न जग्य न ग्याना ।
एक अधार राम गुन गाना ॥
सब भरोस तजि जो भज रामहि ।
प्रेम समेत गाव गुन ग्रामहि ॥
 
भावार्थ :- कलियुग में ना तो योग है..... ना तो यज्ञ है.... और ना ज्ञान है.....
कलयुग में श्री रामजी का गुणगान ही एकमात्र आधार है. इसीलिए सारे भरोसे छोड़कर 
जो मनुष्य श्री रामजी को भजता है.... और प्रेम सहित उनके गुणसमूहों को गाता है....
 
कलिजुग सम जुग आन नहिं जौं नर कर बिस्वास ।
गाइ राम गुन गन बिमल भव तर बिनहिं प्रयास ॥
 
भावार्थ :- अगर मनुष्य विश्वास करे... तो कलियुग के समान दूसरा युग नहीं है...
(क्योंकि) इस युग में श्री रामजी के निर्मल गुणसमूहों को गा - गाकर 
मनुष्य परिश्रम बिना ही संसार रूपी समुद्र से तर जाता है.
 
कलियुग केवल नाम अधारा
सुमिर सुमिर  नर उतरहि  पारा ।
 
जिसका अर्थ है की.... कलयुग में मोक्ष प्राप्त करने का एक ही लक्ष्य है....
और वो है.... भगवान का नाम लेना. तुलसीदास ने अपने पूरे जीवन में कोई भी
ऐसी बात नहीं लिखी जो गलत हो. उन्होंने अध्यात्म जगत को बहुत 
सुन्दर रचनाएँ दी हैं.
 

गोश्वामी तुलसीदास और अकबर..... 

ये बात उस समय की है..... जब भारत पर मुग़ल सम्राट अकबर का राज्य था. 
सुबह का समय था. एक महिला ने पूजा से लौटते हुए तुलसीदास जी के पैर छुए. 
तुलसीदास जी ने  नियमानुसार उसे सौभाग्यशाली होने का आशीर्वाद दिया. 

आशीर्वाद मिलते ही वो महिला फूट-फूट कर रोने लगी और रोते हुए उसने बताया कि.... 
अभी-अभी उसके पति की मृत्यु हो गई है.
 
इस बात का पता चलने पर भी तुलसीदास जी जरा भी विचलित न हुए और वे अपने 
आशीर्वाद को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त थे. क्योंकि उन्हें इस बात का ज्ञान 
भली भाँति था की भगवान श्रीराम बिगड़ी बात संभाल लेंगे और उनका आशीर्वाद 
खाली नहीं जाएगा. 

उन्होंने उस औरत सहित सभी को राम नाम का जाप करने को कहा. वहां उपस्थित 
सभी लोगों ने ऐसा ही किया और वह मरा हुआ व्यक्ति राम नाम के जाप आरंभ होते ही 
जीवित हो उठा.
 
यह बात पूरे राज्य में जंगल की आग की तरह फैल गयी. जब यह बात बादशाह अकबर के 
कानों तक पहुंची तो उसने अपने महल में तुलसीदास को बुलाया और भरी सभा में उनकी 
परीक्षा लेने के लिए कहा की.... कोई चमत्कार दिखाएँ. 

ये सब सुन कर तुलसीदास जी ने अकबर से बिना डरे उसे बताया की.... 
वो कोई चमत्कारी बाबा नहीं हैं. सिर्फ श्री राम जी के भक्त हैं.
 
अकबर इतना सुनते ही क्रोध में आ गया और उसने उसी समय सिपाहियों से कह कर 
तुलसीदास जी को कारागार में डलवा दिया. तुलसीदास जी ने तनिक भी प्रतिक्रिया 
नहीं दी. और राम का नाम जपते हुए कारागार में चले गए. 

उन्होंने कारागार में भी अपनी आस्था बनाए रखी और वहां रह कर ही..... 
हनुमान चालीसा की रचना की और लगातार चालीस दिनों तक उसका निरंतर 
पाठ किया.
 

हनुमान चालीसा चमत्कार....

चालीसवें दिन एक चमत्कार हुआ... हजारों बंदरों ने एक साथ अकबर के राज्य पर 
हमला बोल दिया. अचानक हुए इस हमले से सब अचंभित हो गए. 
अकबर एक सूझवान बादशाह था इसलिए इसका कारण समझते देर न लगी.  
उसे भक्ति की महिमा समझ में आ गई. उसने उसी क्षण तुलसीदास जी से क्षमा मांग कर 
कारागार से मुक्त किया और आदर सहित उन्हें विदा किया. इतना ही नहीं 
अकबर ने उस दिन के बाद तुलसीदास जी से जीवनभर मित्रता निभाई.
 
इस तरह तुलसीदास जी ने एक व्यक्ति को कठिनाई की घड़ी से निकलने के लिए
हनुमान चालीसा के रूप में एक ऐसा रास्ता दिया है... जिस पर चल कर हम किसी भी 
मंजिल को प्राप्त कर सकते हैं.
 
इस तरह हमें भी भगवान में अपनी आस्था को बरक़रार रखना चाहिए. 
ये दुनिया एक उम्मीद पर टिकी है. अगर विश्वास ही ना हो तो हम दुनिया का 
कोई भी काम नहीं कर सकते.

                                             जय जय सियाराम जी 


यह हनुमान चालीसा आप हर दिन पाठ करे. 

दोहा :

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि ।

बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि ।।

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार ।

बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार ।।

 

चौपाई : 

जय हनुमान  ज्ञान गुन सागर ।

जय कपीस तिहुं लोक उजागर ।।

 

रामदूत अतुलित बल धामा ।

अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा ।।

 

महाबीर बिक्रम बजरंगी।

कुमति निवार सुमति के संगी ।।

 

कंचन बरन बिराज सुबेसा ।

कानन कुंडल कुंचित केसा ।।

 

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै ।

कांधे मूंज जनेऊ साजै ।

 

संकर सुवन केसरीनंदन ।

तेज प्रताप महा जग बन्दन ।।

 

विद्यावान गुनी अति चातुर ।

राम काज करिबे को आतुर ।।

 

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया ।

राम लखन सीता मन बसिया ।।

 

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा ।

बिकट रूप धरि लंक जरावा ।।

भीम रूप धरि असुर संहारे ।

रामचंद्र के काज संवारे ।।

 

लाय सजीवन लखन जियाये ।

श्रीरघुबीर हरषि उर लाये ।।

 

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई ।

तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ।।

 

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं ।

अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं ।।

 

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा ।

नारद सारद सहित अहीसा ।।

 

जम कुबेर दिगपाल जहां ते ।

कबि कोबिद कहि सके कहां ते ।।

 

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा ।

राम मिलाय राज पद दीन्हा ।।

 

तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना ।

लंकेस्वर भए सब जग जाना ।।

 

जुग सहस्र जोजन पर भानू ।

लील्यो ताहि मधुर फल जानू ।।

 

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं ।

जलधि लांघि गये अचरज नाहीं ।।

 

दुर्गम काज जगत के जेते ।

सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ।।

 

राम दुआरे तुम रखवारे ।

होत न आज्ञा बिनु पैसारे ।।

 

सब सुख लहै तुम्हारी सरना ।

तुम रक्षक काहू को डर ना ।।

 

आपन तेज सम्हारो आपै ।

तीनों लोक हांक तें कांपै ।।

 

भूत पिसाच निकट नहिं आवै ।

महाबीर जब नाम सुनावै ।।

 

नासै रोग हरै सब पीरा ।

जपत निरंतर हनुमत बीरा ।।

 

संकट तें हनुमान छुड़ावै ।

मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ।।

 

सब पर राम तपस्वी राजा ।

तिन के काज सकल तुम साजा ।।

 

 

और मनोरथ जो कोई लावै ।

सोइ अमित जीवन फल पावै ।।

 

चारों जुग परताप तुम्हारा ।

है परसिद्ध जगत उजियारा ।।

 

साधु-संत के तुम रखवारे ।

असुर निकंदन राम दुलारे ।।

 

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता ।

अस बर दीन जानकी माता ।।

 

राम रसायन तुम्हरे पासा ।

सदा रहो रघुपति के दासा ।।

 

तुम्हरे भजन राम को पावै ।

जनम-जनम के दुख बिसरावै ।।

 

अन्तकाल रघुबर पुर जाई ।

जहां जन्म हरि-भक्त कहाई ।।

 

और देवता चित्त न धरई ।

हनुमत सेइ सर्ब सुख करई ।।

 

संकट कटै मिटै सब पीरा ।

जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ।।

 

जै जै जै हनुमान गोसाईं ।

कृपा करहु गुरुदेव की नाईं ।।

 

जो सत बार पाठ कर कोई ।

छूटहि बंदि महा सुख होई ।। 


जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा ।

होय सिद्धि साखी गौरीसा ।।

 

तुलसीदास सदा हरि चेरा ।

कीजै नाथ हृदय मंह डेरा ।।

 

दोहा :

 

पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप ।

राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप ।।

🌹 जय श्री गणेश 🌹

 

गणपति बप्पा मोरिया.... क्यों कहा जाता है...?  

आज चारो तरफ एक ही गुंज सुनाई दे रही है
"गणपति बप्पा मोरिया" लेकिन क्या हम जानते है....
"गणपतिजी" के साथ "मोरिया" क्यों कहा जाता है....?
 
"मोरिया" "श्री गणेश भगवान् जी" के परम भक्त थे और उनकी भक्ति 
इतनी उत्तम थी कि उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर  "गणपति बप्पा" ने
उन्हे वरदान दिया.... 
आज से जब जब... जहाँ जहाँ मेरा नाम पुकारा जाएगा.....
तो वहाँ मेरे नाम के साथ आपका भी नाम लिया जाएगा. इस तरह
"गणपतिजी" के साथ उनके परम भक्त "मोरिया" का नाम जुड़ा.
और हम कहते है .... "गणपति बप्पा मोरिया"
 
हम सभी के घर में "श्री गणेश भगवान्" का आगमन हुवा है.
तो हम इन शेष दिनो में ऐसी "गणपति बप्पा" की
पूजा-अर्चना,  प्रेम भाव से सेवा करें कि गणपतिजी का
प्रगट्य् हमारे अंदर हो....!
 
"गणपति बप्पा सभी के घर सुख-शांति तथा ज्ञान... धन.....
और गुणो का भंडार ले आए ये ही शुभ आशीर्वाद.
 
।। श्री गणेश उत्सव की शुभकामनाएं ।।
 
🌹गणपति बप्पा मोरिया 🌹

🙏🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹🙏

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