संत वाणी - आनंद - सुविचार - Good Thoughts In Hindi On Life

 संत वाणी - आनंद - सुविचार - Good Thoughts In Hindi On Life 

good-thoughts-in- hindi-on-life-hindi-suvichar-vb-good-thoughts
                                            संत वाणी - सुविचार - Good Thoughts In Hindi On Life 

बीता हुआ हर लम्हा जिंदगी को समझाने के लिए एक अच्छा मौका है.
और आने वाला हर लम्हा जिंदगी को जीने के लिए दूसरा मौका हैं.

संत वाणी - सुविचार - आनंद - Good Thoughts In Hindi On Life 


ज़माने की बातों में और संतो की बातों में
ज़मीन – आसमान का अंतर है होता है...!

 

जमाना कहता है - आँख खोल कर देखो...!
संत कहते है - आँख बंद कर के देखो...!
जमाना कहता - कान खोल कर सुनो...!
संत कहते है - कान बंद कर के सुनो...!
जमाना कहता है - जीना सीखो...!
संत कहते है - मरना सीखो...!


मरने से भाव जीते जी मरने से है...
जिसमे मनुष्य ध्यान लगाकर अपने भीतर प्रभु को पा लेता है...!
इस पूरी प्रक्रिया के दौरान आत्मा वैसे ही शरीर से निकलकर
यात्रा करती है... जैसे मौत के समय निकलती है...
लेकिन इसमें आत्मा शरीर को हमेशा के लिए नहीं छोड़ती...!
प्रभु से मिलकर वापस इसी शरीर में आ जाती है...!

 

कान बंद कर के सुनने और आँख बंद कर के देखने से भाव ये है कि...
आत्मा की दो शक्तियां होती है...!  सुनने की और देखने की...!
और संत जन हमें इसी शक्ति को उजागर करने की सीख देते है...!

 

जमाना तो सिर्फ बाहर मुखी क्रिया में लगा रहता है...
और मनुष्य के असली उदेश्य से भटका देती है...!

 

आओ सतगुरु से हम प्रेम मांगे...
जीवन जीने की तरीका मांगे...
अपने लिए तो बहुत मांगा है...
आज सब के लिए भला मांगे...!

 

सुख का अर्थ केवल कुछ पा लेना नहीं है... बल्कि जो है उसमे संतोष कर लेना भी है.
जीवन में सुख तब नहीं आता... जब हम ज्यादा पा लेते हैं... बल्कि तब आता है...
जब ज्यादा पाने का भाव हमारे भीतर से चला जाता है.

 

अगर पाने की इच्छा समाप्त नहीं हुई हो तो...
सोने के महल में भी मनुष्य दुखी हो सकता है...! 
और अगर ज्यादा पाने की लालसा मिट गई हो तो...
झोपड़ी में भी मनुष्य परम सुखी हो सकता है...!
मतलब असंतोषी को तो कितना भी मिल जाये वह हमेशा अतृप्त ही रहेगा...!

 सुख बाहर की नहीं... भीतर की संपदा है. यह संपदा धन से नहीं धैर्य से प्राप्त होती है.

हमारा सुख इस बात पर निर्भर नहीं करता कि... हम कितने धनवान है बल्कि... 
इस बात पर निर्भर करता है कि... हम कितने धैर्यवान हैं. 
सुख और प्रसन्नता आपकी सोच पर निर्भर करती है.
जिस प्रेम आनंद भगवान को आप खोज रहे हो... 
वह तो आपके अंदर ही मौजूद है...! जिसके लिए आप जन्मों-जन्मों से भटक रहे हो... 
उससे एक क्षण को भी आप दूर नहीं है.
वह हमेशा से आपके अंदर बैठे है. बस...! आपको अपने अंदर लौट कर आना है.
जरा लौटो... बस इतना ही समझना है यही सार है.

 ज़माने की तरफ आंख बहुत खोली... 
अब अपनी तरफ आंख खोलो. 
मतलब ध्यान द्वारा अपनी अंतरात्मा में अपने प्रभु का दर्शन कीजिये.

 

बहुत पढ़ लिया ज़माने को... अब अपने स्वयं को पढ़ो... अपनी आत्मा को पहचानो...
फिर कोई असंतोष नहीं होगा... कोई दुख नहीं होगा... कोई भरम नही होगा...

आप हो तो दुनिया है...! आप नही तो दुनिया नही...! आप हो तो आनंद है...!
आप नही तो आनंद नही...!

 

हमसे गलती यही हो रही है कि... दुनिया के लिए... आनंद के लिए... स्वयं से दूर जा रहे है.
लौट आओ एक बार अपनी ओर... जो बाहर ढूंढ रहे हो वह आपके अंदर विराजमान है.

 

लोगों ने कहा मेरा कुछ काम नहीं होगा...! मै किस्मत का मारा हूँ...!
मैने भी हँस कर उनसे कहा... मेरा सारा काम होगा...! क्योकि...
मै सांवरे का प्यारा हूँ...!

 

  राधे राधे

 हर हर महादेव

Post a Comment

0 Comments