सकारात्मक सोच की शक्ति...! - हिंदी कहानी - Hindi Kahani - Story

 

सकारात्मक सोच की शक्ति...! - Hindi Kahani 

एक व्यक्ति रेलवे स्टेशन से ऑटो में बैठकर अपने घर जा रहा था.

ऑटो वाला भी बड़े ही आराम से ऑटो चला रहा था. तभी एक कार अचानक ही

पार्किंग से निकलकर रोड पर आ गई. ऑटो ड्राइवर ने तेजी से ब्रेक लगाया और

कार और ऑटो की टक्कर होते – होते बच गई.

 

कार चलाने वाला व्यक्ति गुस्से से कार से बाहर निकलकर जोर जोर से ऑटोवाले

को ही बुरा - भला कहने लगा. जबकि गलती उस कर वाले की ही थी...!

ऑटो चालक एक धार्मिक और हमेशा सकारात्मक विचारों को सुनने - सुनाने

वाला था. ऑटोवाले ने कार वाले की बातों का न तों कोई जवाब दिया और 

नाहीं कार वाले पे गुस्सा किया... एकदम शांति से माफ़ी मांगकर आगे निकल गया.

उस ऑटो में बैठे व्यक्ति को कार वाले के व्यवहार पर गुस्सा आ रहा था और

उसने ऑटो वाले से पूछा... तुमने उस कार वाले को बिना कुछ कहे ऐसे ही

क्यों जाने दिया... पूर्णरूप से गलती उसकी थी. और उपर से वहीं तुम्हे

भला बुरा कहने लगा. वो तो हमारे नसीब....! नहीं तो उसकी वजह से हम अभी 

अस्पताल में होते.


ऑटो वाले ने बहुत ही दिल को छू लेने वाला जवाब दिया...

साहब...! कई लोग कचरे के ट्रक की तरह होते है... वे अपने दिमाग में...

कई तरह का कचरा भरे हुए चलते हैं...! वास्तविक उन चीजों की जीवन में कोई

आवश्यकता नहीं होती. उनको बड़ी ही मेहनत से जोड़ते रहते हैं.

जैसे.... क्रोध, घृणा, चिंता, निराशा और बहुत कुछ... जब उनके दिमाग में ये सब

 कचरा बहुत अधिक हो जाता है तो... वो लोग अपना बोझ हल्का करने के लिए

इसे दूसरों पर फेंकने का अवसर ढूँढ़ने लगते हैं.


इसलिए .....मैं ऐसे लोगों से दूरी बनाए रखता हूँ और उन्हें दूर से ही मुस्कराकर

नमस्ते कह देता हूँ... क्योंकि... अगर उन जैसे लोगों द्वारा गिराया हुआ कचरा 

मैंने अपनाया तो... मैं भी कचरे का ट्रक बन जाऊँगा और अपने साथ-साथ आसपास 

के लोगों पर भी वह कचरा गिराता रहूँगा.


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मेरे हिसाब से जीवन बहुत सुंदर है इसलिए... जो हमसे अच्छा व्यवहार करते हैं

उन्हें धन्यवाद कहो और जो हमसे अच्छा व्यवहार नहीं करते उन्हें मुस्कुराकर 

भुला दो. हमें यह हमेशा याद रखना चाहिए की.... 

सभी मानसिक रोगी केवल अस्पताल में ही नहीं रहते हैं.... 

कुछ हमारे आसपास खुले में भी घूमते रहते हैं...!


प्रकृति के नियम :-

अगर खेत में बीज न डाले जाएँ तो... निसर्ग उसे घाँस - फूस से भर देता है...

उसी प्रकार से... अगर दिमाग में सकारात्मक विचार न भरें जाएँ तो

नकारात्मक विचार अपनी जगह बना ही लेते हैं.


दूसरा नियम है की...

जिसके पास जो रहता है.... उसीको वह बाँटता है...

जिसके पास सुख है वह सुख बाँटता है...!

जिसके पास दुःख है... वह दु:ख बाँटता है...

जिसके पास ज्ञान है... वह ज्ञान बाँटता है...

जो अपने जीवन में भ्रमित है... वह भ्रम बाँटता है...

और... जो डरा हुवा है... वह डर बाटता है...! वह दूसरों को डराता है...!

दबा हुआ दूसरों को दबाता है...

चमका हुआ दूसरों को चमकाता है...

इसलिए.... नकारात्मक लोगों से दूरी बनाकर

अपने आप को नकारात्मकता से दूर रखे...

और जीवन में हरदम सकारात्मकता अपनाएं...


हरी ॐ जय श्री कृष्णा

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