दिल को छू जाएगी ये Heart Touching Story

 

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दिल को छू जाएगी ये Heart Touching Story

विशाल जी ऑफिस से घर आये और आते ही पत्नी को आवाज लगायी...
अरी सुनती हो...! जल्दी से इधर आओ...!
आवाज सुनते ही विशाल जी की पत्नी हाथ मेँ पानी का गिलास लेकर
बाहर आयी और पत्नी के आते ही विशाल जी बड़े ही खुश होकर बोले...
अपनी निधि के लिए बहुत अच्छा रिश्ता आया है..
अच्छा भला सुखी और इज्जतदार परिवार है...
लडके का नाम अजय है.
विद्युत विभाग मे काम करता है.
बस... निधि बेटी हाँ कह दे तो दोनों की सगाई कर देते है.

उनको निधि एक ही लडकी थी... छोटा सा परिवार... तीन लोग...
घर मेँ हमेशा आनंद का वातावरण रहता था.
कभी कभार विशाल जी धूम्रपान और तम्बाकू सेवन की वजह से
उनकी पत्नी और बेटी के साथ कहा सुनी हो जाती थी...
लेकिन विशाल जी इसको हँसी मेँ निकाल देते थे.

उनकी बेटी निधि बहुत ही समझदार और संस्कारी लड़की थी
दसवी कक्षा में पास होने के बाद निधि, सिलाई काम करके अपने पिता
की सहायता करने की कोशिश करती थी.

निधि सिलाई और बच्चों की ट्युशन लेते हुवे स्वयं ग्रेजुएट हुईं...
अभी निधि एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी कर रही है.
लेकिन विशाल जी बेटी के पगार से एक रुपया भी नहीं लेते थे.
और बेटी को कहते.... निधि बेटा...
तेरे पगार के पैसे तेरे पास ही रहने दे. भविष्य मेँ तेरे बहुत काम आयेंगे.

आगे दोनो परिवार की सहमति से निधि और अजय का रिश्ता तय हुवा.
एक अच्छा सा दिन देखकर सगाई कर दी गई और
शादी का मुहूर्त भी निकलवा दिया.

अब शादी के 15 ही दिन रह गए थे. विशाल जी ने अपने बेटी को
पास में बिठाया और कहा... निधि बेटा, तेरे ससुर जी से मेरी बात हुई है...
उन्होने साफ साफ कहा है की... दहेज के रूप मेँ उन्हें रुपया... गहने...
या दूसरी कोई चीज..... ऐसा कुछ भी नही चाहिए...
तो बेटा तेरे शादी के लिए मेँने कुछ रुपये जमा किए है....
यह दो लाख रुपये मैँ तुझे देता हूँ. आगे तेरे भविष्य मेँ काम आयेगे.
इन पैसों को तू तेरे खाते मे जमा करवा देना.
ठीक है पापा बोलकर निधि अपने कमरे में चली गई.

समय निकल गया और वो शुभ दिन भी आ गया...
बारात भी आ गई.... पंडितजी ने विवाह विधि शुरु की...
थोड़ी देर बाद फेरे लेने का समय आया....
तभी निधि ने एकदम मीठे शब्दों में कहा... पंडितजी जी जरा रुकिए...
मुझे आप सभी के सामने मेँ मेरे पापा के साथ कुछ बात करनी है...

मेरे प्यारे पापा... आप ने मुझे लाड प्यार से बडा कियापढायालिखाया...
खूब स्नेह भी दिया... इसका कर्ज तो मै कभी नहीं चुका सकती.
लेकिन अजय और मेरे ससुर जी की सहमति से आपने दिया हुवा
दो लाख रुपये का चेक मैँ आपको वापस दे रही हूँ.
इन रुपयों में से मेरी शादी के लिए... लिया हुवा उधार वापस दे देना
और दूसरा चेक तीन लाख जो मैंने अपनी पगार मेँ से बचत की है...
ये पैसे जब आप रिटायर होगेँ तब आपके काम आयेंगे पापा... 

पापा...! मैँ नही चाहती कि आप को बुढापे मेँ
आपको किसी के आगे हाथ फैलाना पडे...!
अगर मैँ आपका लडका होता तब भी इतना तो करता ना पापा...?
वहाँ पर मौजूद सभी लोंगो की नजर निधि पर थी...
पापा अब मैं आपसे जो दहेज मेँ मांगू वो दोगे...?
विशाल जी ने भारी आवाज मेँ कहा... हां बेटा... इतना ही बोल सके.
तो पापा आप मुझे वचन दीजिये की...
आज के बाद आप सिगरेट को हाथ नही लगायेंगे....
तबांकु और सुपारी का व्यसन आज से छोड दोगे.
सब की मौजूदगी में दहेज मेँ बस इतना ही मांगती हूँ पापा...

विशाल जी या कोई भी लडकी का बाप मना कैसे करता...?
शादी मे लडकी की विदाई समय कन्या पक्ष को रोते देखा होगा...
लेकिन आज तो बारातियो कि आँखो मेँ आँसुओ कि धारा निकल चुकी थी.

मैँ दूर से निधि को लक्ष्मी रुप मे देख रहा था...!
501 रुपये का लिफाफा मैं अपनी जेब से नही निकाल पा रहा था....
साक्षात लक्ष्मी को मैं कैसे लक्ष्मी दूं...लेकिन एक सवाल मेरे मन मेँ जरुर उठा...
भ्रूण हत्या करने वाले लोगो को निधि जैसी लक्ष्मी मिलेगी क्या...?

कृपया रोईए नही...! आंसू पोछिए और प्रेरणा लीजिये...!


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