दान सुविचार - जो अंदर होगा वहीं बाहर निकलेगा


जो अंदर होगा वहीं बाहर निकलेगा 

राजा हरिश्चंद्र एक बहुत बड़े दानवीर थे. उनकी दान करने की विशेषता
यह थी की.. जब भी राजा साहब कुछ भी दान करते हुए अपने दोनों हाथ
आगे करते तो अपनी नज़रें नीचे झुका लेते थे...!

 सभी को ये बात अजीब लगती थी की...  ये राजा कैसे दानवीर हैं....
जो दान भी देते है और दान देने में इन्हें शर्म भी आती है .

जब ये बात तुलसीदासजी तक पहुँची तो उन्होंने राजा साहब को
चार पंक्तियाँ लिख भेजीं जिसमें लिखा था...
ऐसी देनी देन जु...
कित सीखे हो सेन।
ज्यों ज्यों कर ऊँचौ करौ...
त्यों त्यों नीचे नैन।।
इसका अर्थ यह था की.... राजा तुम ऐसा दान देना कहाँ से सीखे हो...?
जैसे जैसे तुम्हारे हाथ ऊपर उठते हैं वैसे वैसे तुम्हारी नज़रें...
तुम्हारी आँख नीचे क्यूँ झुक जाती है...?

राजा हरिश्चंद्र जी ने इस प्रश्न का जो उत्तर दिया वो उत्तर इतना सुंदर था की
जिसने भी सुना वो राजा को ह्रदय से आशीर्वाद देने लगा... और राजा का
मान उसके दिल में और बढ़ गया और वो उसका प्रशंसक बन गया.

इतना सुंदर उत्तर आज तक किसी ने किसी को नहीं दिया...
राजा ने जवाब में लिखा...
देनहार कोई और है...
भेजत जो दिन रैन।
लोग भरम हम पर करैं...
तासौं नीचे नैन।।
इसका अर्थ है की... देने वाला तो कोई और है... वो भगवान है...
वो परमात्मा है.... वो दिन रात भेज रहा है... लेकिन लोग ये समझते हैं कि...
मैं दे रहा हूँ.... यह राजा दे रहा है... यही सोच कर मुझे शर्म आ जाती है...
और मेरी आँखें नीचे झुक जाती हैं...!
करता भी वही है... करवाता भी वही है... क्यों इंसान तू इतना अकड़ता है...!
अरे एक साँस भी नही है तेरे बस की... वो ही सुलाता और वो ही जगाता है...!

अगर अंदर क्षमा होगी...
तो बाहर क्षमा ही निकलेगी.

अगर अंदर क्रोध भरा होगा
तो बाहर भी क्रोध ही निकलेगा.
इसलिये जब जो भी
बाहर निकले उसका दोष
दूसरो को ना दें...!
यह हमारी ही संपदा है...
जिसे अपने भीतर छुपाये हैं.

अज्ञानी व्यक्ति
गलती छिपाकर बडा बनना चाहता है.
औऱ ज्ञानी व्यक्ति गलती मिटाकर
बडा बनना चाहता है.

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दान सुविचार - जो अंदर होगा वहीं बाहर निकलेगा 

मुस्कान सबसे बड़ा दान...
इसलिए रोज कम से कम 
एक दुखी चहरे पर मुस्कुराहट
लाने की कोशिश कीजिए.

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यदि आपके चंद मीठे बोलो से किसी का 
रक्त बढ़ता है तो यह भी रक्तदान है...! 

यदि आपके द्वारा किसी की पीठ थपथपा ने से 
उसकी थकावट दूर होती है तो यह भी श्रमदान है...!

यदि आप कुछ भी खाते समय उतना ही प्लेट में 
ले की कुछ भी व्यर्थ ना जाए तो अन्नदानहै...!

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दान सुविचार - जो अंदर होगा वहीं बाहर निकलेगा 
 देने के लिए दान...
लेने के लिए ज्ञान...
और त्यागने के लिए...
अभिमान सर्वश्रेष्ठ है.

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दान सुविचार - जो अंदर होगा वहीं बाहर निकलेगा 
सच्चे ह्रदय से किया हुवा दान 
कभी भी व्यर्थ नहीं जाता.

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दान सुविचार - जो अंदर होगा वहीं बाहर निकलेगा 
 सुविचार
दान छापकर नहीं
दान छुपाकर दो.

ढोंग का जीवन नहीं...
ढंग का जीवन जियो...

सत्य शांत होता है...
असत्य शोर मचाता है.
अंत:करण भगवन की बनाई अदालत है...

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दान सुविचार - जो अंदर होगा वहीं बाहर निकलेगा 
 इस पृथ्वी पर...

दान जैसा उत्तम कार्य नहीं...
लोभ जैसा शत्रु नहीं.

लोभ जैसा शत्रु नहीं.

अच्छे स्वभाव जैसा आभूषण नहीं...
संतोष जैसा धर्म नहीं...


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मजबूर की सहायता करना 
प्यासे को पानी पिलाने के सामान पुण्य है.
और वैभवशाली को दान देना... 
कुंए में पानी गिराने के सामान मुर्खता है...!
क्योंकि दान या सहायता का महत्व 
आवश्यकता से होता है.

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