दिल को छू जाने वाली कहानी - Heart Touching Hindi Story - लघु कथा

दिल को छू जाने वाली कहानी - 

Heart Touching Hindi Story - लघु कथा 

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दिल को छू जाने वाली कहानी - Heart Touching Hindi Story - लघु कथा 

आकरे जी आज ऑफिस से जल्दी घर के लिए निकले. घर पे कुछ मेहमान आ रहे थे.
घर जाते हे रास्ते में एक बूढी सी महिला ताजे आम बेचते हुए नजर आई. आकरे जी थोड़ी देर रुक गए 
और सोचने लगे की क्यों न मेहमानों के लिए आम रस बनाया जाए. पत्नी को फ़ोन लगाया, पत्नी ने भी 
ठीक है कहते हुए दो किलो आम लाने को कहा.

आकरे जी वैसे तो हमेशा ऑफिस और घर के रस्ते में पड़नेवाली " अपना फ्रूट भंडार " से ही लेते थे, 
और वह दुकान, जहां रुके थे, वहा से आगे थोड़ी ही दुरी पर थी.

थोड़े देर सोचने पर आकरे जी को लगा की, आम बहुत अच्छे दिख रहे है, इस बुढिया के पास से ही 
ले लेता हु. बुढिया के पास गए और बोले - माताजी आम कैसे दिए
बुढ़िया बोली - 70 रूपये किलो. 
आकरे जी बोले - माताजी दो किलो चाहिए,  50 रूपये लगा दीजिये.... 
बुढ़िया ने कहा - नहीं बेटा, 50 रूपये में नहीं पुरायेगा... 60 रूपये दे देना, दो पैसे का मुझे भी 
फायदा हो जायेगा.
आकरे जी बोले - 50 में देते हो तो बताओ...
बुढिया ने निराश चेहरे से ना में गर्दन हिला दी.

आकरे जी बिना कुछ कहे वहा से निकल गए और सीधे अपनी हमेशा वाली दुकान 
अपना फ्रूट भंडार पे आकर आम का भाव पूछा तो दुकानदार बोला - 80 रूपये किलो.
कितना दूँ साहेब...?
आकरे जी - सालो से तुम्हारी दुकान से ही फल लेता हूँ.
 थोडा ठीक ठाक भाव लगाओ भाई...
तो दुकानदार ने सामने लगे बोर्ड की ओर इशारा कर दिया....
उस बोर्ड पर लिखा था- " मोल भाव करने वाले माफ़ करें "

आकरे जी को दुकानदार का यह व्यवहार बहुत बुरा लगा... उन्होंने थोड़ी देर कुछ सोचा और वापस 
ऑफिस की ओर निकल पड़े... और उस बुढिया के पास पहुँच गए.

उस बुढ़िया ने उन्हें पहचान लिया और बोली... बेटा आम तो मै दूंगी, 
लेकिन 60 रूपये किलो से कम नहीं दूंगी.
आकरे जी बोले - माताजी अब 2 नहीं 3 किलो आम दे दो. और भाव की चिंता मत करो.
बुढिया का चेहरा खुशी से चमकने लगा.

बुढिया ने तीन किलो आम तौले और देते हुए बोली, बेटा मेरे पास थैली नहीं है.
आगे बुढिया बोली.. बेटा एक समय पे हमारे पास भी थैली रहती थी, हमारी भी एक छोटी सी फल की 
दुकान थी, जब मेरे पति जिन्दा थे. हम दोनों फल और सब्जी बेचते थे, लेकिन पति बीमार हो गए 
और उनके इलाज में सब पैसा खत्म हो गया,  और पति की भी मृत्यु हो गयी, अभी तो खाने के भी 
लाले पड़े है...! जैसे तैसे अपना पेट भर रही हूँ, कोई संतान भी नहीं है.... 
जिसकी तरफ मदद मांग सकू...! ये बोलते बोलते उसकी आँख भर आई...

आकरे जी ने बुढिया को 500 का नोट दिया
बुढिया बोली - बेटा मेरे पास छुट्टे नहीं है...!
आकरे जी बोले - माताजी चिंता मत करो, ये 500 रूपये रख लो और कल मै आपको 2000 रूपये दूंगा, 
थोडा थोडा कर के चूका देना, और परसों से अपनी दुकान में अलग अलग तरह के फल रखना,
वह बुढिया कुछ कह पाती, उससे पहले ही आकरे जी अपने आम लेकर घर की तरफ निकल चुके थे...!

घर पहुंचकर उन्होंने पत्नी को आम देते हुए कहने लगे...
पता नहीं क्यों हम, हमेशा ही मुश्किल से दो पैसे कमाने वाले, छोटी दुकान से सामान लेते हुए बहुत 
मोल भाव करते है, लेकिन बड़ी दुकानों पर जाते ही... मुंह मांगे पैसे देते है...!

कैसी हमारी मानसिकता हो गयी है... हम जो भी खरीद ते है उसकी गुणवत्ता देखने की बजाय 
उस दुकान की चकाचौंध पर ज्यादा ध्यान देते हैं...!

दुसरे दिन आकरे जी ऑफिस जाते हुए उस बुढिया को 2000 रुपये दिए और कहा.... 
माताजी पैसे चुकाने की चिंता मत करना...! मै जो फल खरीदूंगा उसकी कीमत मे ही पैसे चुक जायेंगें...!

जब आकरे जी ने यह बात अपने ऑफिस में बताई तो.. सभी ने बाहर से फल खरीदने की बजाय 
उस बुढिया से ही फल खरीदना सुरु किया.
छह महीने बाद ऑफिस के लोगों ने सब मिलकर अपनी ओर से उस बुढ़िया को 
एक हाथ ठेला भेंट कर दिया.

बुढ़िया अब बहुत खुश रहने लगी, दो पैसे होने से खाना भी खाने लगी जिससे उसकी तबियत भी 
पहले से काफी अच्छी रहने लगी...! 

बुढिया हर दिन आकरे जी और उनके ऑफिस के दूसरे लोगों का धन्यवाद करते नही थकती थी. 
और आकरे जी के मन में भी अपनी बदली हुई सोच और एक असहाय निर्बल महिला की मदत 
करने का समाधान का भाव रहता है...!

" मित्रो  जीवन मे किसी निःसहाय की मदद करके देखो...! आपको 
अपनी पुरे जीवन  मे किये गए सभी कार्यों से ज्यादा  मिलेगा."

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