Good Thoughts In Hindi - लोगों के घरों में अंधे बनकर जाओ और वहां से गूंगे बनकर निकलो - Suvichar

Good Thoughts In Hindi - लोगों के घरों में अंधे बनकर जाओ 


और वहां से गूंगे बनकर निकलो - Suvichar

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जय श्री कृष्णा 
दो सहेली की अचानक बाजार में खरेदी करते हुए मुलाकात होती है... 
पहिली सहेली -  बड़ी प्यारी बच्ची है... किसकी है..? 
दूसरी सहेली - मेरी बेटी है... 
पहिली सहेली - अरे तू माँ बन गई.... congrats... वैसे इस बच्ची के जन्म की खुशी में तुम्हारे 
पति की और से तुम्हे क्या उपहार मिला...?
दूसरी सहेली - कुछ नहीं दिया...
पहिली सहेली - क्या बात करती हो...! तुम्हारे पति की नजरों में तुम्हारी कोई कीमत नहीं...? 
ये अच्छी बात नहीं है...

शब्दोँ का जहरीला बम गिराकर अपनी सहेली को चिंता में डालकर निकल गई.
दूसरी सहेली बाज़ार से कुछ भी ना खरीदें घर आ गई.
कुछ देर बाद उसका पति घर आया तो देखा पत्नी का चेहरा उतरा हुवा है, 
उसने जानना चाहा तो दोनों में झगडा हो गया नौबत तलाक तक आ गई 
और अंत में तलाक हो हि गया.
जानते हो समस्या की सुरुवात कहा से हुई...? उस बेकार से सवाल से... 
जो उस सहेली ने पूछा था...!

अजय ने अपने खास मित्र किशोर से पूछा, कैसे हो और क्या कम चल रहा है...?
किशोर - ठीक हूँ... वो पुरानीं कंपनी में ही काम चालू है...
अजय - ठीक है, अभी कितनी पगार दे रहा है मालक..?
किशोर - 20,000 रूपये 
अजय - सिर्फ  20,000 रूपये...! इतने कम पैसो में कैसे गुजरा कर लेते हो...? 
किशोर -  ( गहरी सांस खींचते हुए ) -  क्या बताऊं यार... बस कट रही है जिंदगी...

मुलाकात ख़त्म हुई, दोनों अपने - अपने रस्ते निकल गए.... लेकिन किशोर का मन अब अपने
काम में नहीं लग रहा था, और उसने कुछ दिनों बाद सीधे अपने मालिक से पगार बढ़ने की बात 
की और मालक ने साफ़ मना कर दिया. किशोर ने जॉब छोड़ दिया... और बेरोजगार हो गया. 
पहले उसके पास एक नौकरी थी... अब नौकरी नहीं रही.

एक बुजूर्ग दम्पति का बेटा परिवार के साथ उसी शहर में किराये से रहता था, 
क्योकि उसका घर छोटा था और ऑफिस भी दूर पड़ता था. 
एक पहचान के साहब ने उस बुजुर्ग दम्पति से कहा... आपका बेटा आपसे बहुत कम
मिलने आता है...? क्या उसे आपकी कोई चिंता नहीं, और प्रेम भी नहीं...?
माँ ने कहा - ऐसा कुछ नहीं है, मेरा बेटा अपने काम में ज्यादा व्यस्त रहता है,
और उसका भी परिवार है, उन्हें भी वक़्त देना पड़ता है.
वो साहब बोला -  वाह...! यह क्या बात हुई भाभीजी,  तुमने उसे पाल पोसकर बड़ा किया, 
उसकी हर इच्छा आपने पूरी की, अब आपके बुढ़ापे में उसको व्यस्तता से आप लोगो से मिलने 
का भी समय नहीं मिल रहा है...? ये कुछ नहीं, ना मिलने का बहाना है.
इस बातचीत के बाद माँ - बाप के मन में बेटे के प्रति शंका पैदा हो गई....
अब उनका बेटा जब भी मिलने आता तो, उसके माँ बाप यही सोचते रहते की, 
बेटे के पास सबके लिए समय है... सिर्फ माँ-बाप के लिए नहीं है...! 

हमेशा याद रखिए जुबान से निकले हुए शब्द, दूसरे पर बहुत ही गहरा असर डाल देते हैं. 
बेशक कुछ लोगों के मुह से जहरीले बोल निकलते हैं...

हमारी प्रतिदिन की ज़िंदगी में बहुत से सवाल हमें, बहुत ही मासूम लगते हैं...
 जैसे - तुमने यह क्यों नहीं खरीदा...?
 तुम्हारे पास यह क्यों नहीं है...?
 इस इंसान के साथ तुम पूरी जिंदगी कैसे चल सकती हो...?
उसे तुम कैसे मान सकते हो...? वगैरा वगैरा....


इस तरह के बेकार और बेमतलबी के सवाल, या तो नादानी में या बिना मकसद के हम 
पूछ बैठते हैं...! जबकि हम यह भूल जाते हैं कि हमारे ये सवाल सुनने वाले के दिल में नफरत 
या मोहब्बत का कौन सा बीज बो रहे हैं.

आज के इस दौर में हमारे आजू - बाजु, हमारा समाज या घरों में जो तनाव बढ़ते जा रहे है,
 उनकी जड़ तक जाया जाए तो अक्सर उसके पीछे किसी और का हाथ होता है. 
वो ये नहीं जानते की, नादानी में या जानबूझकर बोले जाने वाली हमारी बकवास से किसी की 
ज़िंदगी को तबाह हो सकती है...! ऐसी जहरीली हवा फैलाने वाले हम ना बनें. 

लोगों के घरों में अंधे बनकर जाओ और वहां से गूंगे बनकर निकलो.

जय श्री कृष्णा 

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